सहस्रं तु पितॄन् माता गौरवेण अतिरिच्यते ||
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Thursday, 15 March 2018
सहस्रं तु पितॄन् माता गौरवेण अतिरिच्यते ||
Sunday, 10 September 2017
गुरुरेव गतिः गुरुमेव भजे
गुरुणैव सहास्मि नमो गुरवे ।
न गुरोः परमं शिशुरस्मि गुरोः
मतिरस्ति गुरौ मम पाहि गुरो ॥
The guru is my sole refuge. I worship my guru. I am always with my guru. Salutations to the guru. There is none higher than the guru. I am a child of my guru. My intellect is firmly fixed on the guru. Oh preceptor! Protect me.
Tuesday, 5 September 2017
किमत्र बहुनोक्तेन शास्त्रकोटि शतेन च ।
दुर्लभा चित्त विश्रान्तिः विना गुरुकृपां परम् ॥
What else can be said, one who recite the stotram, looks like Lord Narshimha and whatever he wishes in his mind is accomplished, there is no doubt about this truth.
बहुत कहने से क्या ? करोडों शास्त्रों पढने से भी क्या ? चित्त की परम् शांति, गुरु की कृपा के बिना मिलना दुर्लभ है ।
बालमंदिर से लेकर प्रवर्तमान समय तक के मेरे सभी वंदनीय गुरुजनो के चरणों मे कोटि कोटि वंदन । सदैव आपकी कृपा का अभ्यर्थी।
Saturday, 8 July 2017
दृष्टान्तो नैव दृष्टस्त्रिभुवनजठरे सद्गुरोर्ज्ञानदातुः
स्पर्शश्चैत्तत्र कल्प्यः स नयति यदहो स्वर्णतामश्मसारम्
न र्स्पशत्वं तथापि श्रितचरणयुगे सद्गुरुः स्वीयशिष्ये
स्वीयं साम्यं विधत्ते भवति निरुपमस्तेन वा लौकिकोऽपि॥
तीनों लोक (स्वर्ग, पृथ्वी, पाताल)में ज्ञान देनेवाले गुरु के लिए कोई उपमा नहीं दिखाई देती । गुरु को पारसमणि के जैसा मानते है, तो वह ठीक नहीं है, कारण पारसमणि केवल लोहे को सोना बनाता है, पर स्वयं जैसा नहि बनाता ! सद्गुरु तो अपने चरणों का आश्रय लेनेवाले शिष्य को अपने जैसा बना देता है; इस लिए गुरुदेव के लिए कोई उपमा नहि है, गुरु तो अलौकिक है ।
Monday, 19 June 2017
चक्षुरुन्मीलितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः।
जिसने ज्ञानाञ्जल रूप शलाका से, अज्ञानरूप अंधकारसे अंध हुए लोगोंकी आँखे खोली, उन गुरुको नमस्कार है।
Salute to the guru(teacher), who opens eyes of a person blind due to darkness of ignorance, by knowledge. Guru is one of the most honorable personalities in Indian (Hindu) tradition.
Sunday, 18 June 2017
गुरुवृत्यनुरोधेन न किञ्चिदपि दुर्लभं।
जो व्यक्ति अपने गुरुका आदर करता है उसे स्वर्ग, धन, अनाज, ज्ञान, पुत्र और सुख इनमेंसे कुछ भी अप्राप्य नहीं है।
Heaven, wealth, grain(food), knowledge, children and pleasure too none of these are unattainable for one who reveres his teacher.
Wednesday, 14 June 2017
ब्रह्मानन्दं परमसुखदं केवलं ज्ञानमूर्तिम्
द्वन्द्वातीतं गगनसदृशं तत्त्वमस्यादिलक्ष्यम् ।
एकं नित्यं विमलमचलं सर्वधीसाक्षीभूतम्
भावातीतं त्रिगुणरहितं सद्गुरुंतं नमामि ॥
_(Salutations to the Sad-Guru) Who is the source of Eternal Bliss, the Bestower of Supreme Joy, the Absolute, the Embodiment of Knowledge , Beyond Duality, Boundless and Infinite Like the Sky, Who is Indicated only Like Tat-Tvam-Asi (That-Thou-Art).
(The Sad-Guru) Who is unique, Eternal, Stainless, Pure, Immovable, & the Witness of the Intelligence of All Beings, Beyond the States of Mind, free from Three Gunas (satva, rajas and tamo guna); Salutations to that Sad-Guru._
हंमेशां सर्वोत्तम परमसुख देनेवाले, ज्ञानी का संपूर्ण स्वरुप धारण करनेवाले, अजोड और आकाश की तरह अनंत रुपवाले, जिनको सब लोग ´ये ही है´ करके पूकारते है – वो सत् गुरु को सादर प्रणाम ।
ऐसे अद्वितीय, पवित्र, सतेज बुद्धिवाले जो तीनों गुणोंसे (सत्व, रजस् और तमस्) निस्पृह है वो सत् गुरु को साष्टांग दंडवत् प्रणाम ।
Monday, 12 June 2017
यथा खनन् खनित्रेण नरो वार्यधिगच्छति तथा गुरुगतं विद्यां शुश्रूषुरधिगच्छति ||
Just as a person gets water after digging earth with a spade, so also a student who serves his guru gets knowledge.
भूमिमे पहार से गड्डा करनेवाले को जिस तरह पानी मिलता है, उसी तरह गुरु की सेवा करनेवालेको विद्या प्राप्त होती है।
किमत्र बहुनोक्तेन शास्त्रकोटि शतेन च ।
दुर्लभा चित्त विश्रान्तिः विना गुरुकृपां परम् ॥
What else can be said, one who recite the stotram, looks like Lord Narshimha and whatever he wishes in his mind is accomplished, there is no doubt about this truth.
बहुत कहने से क्या ? करोडों शास्त्रों से भी क्या ? चित्त की परम् शांति, गुरु के बिना मिलना दुर्लभ है ।
Friday, 2 June 2017
भर्ता च स्त्रीकृतं पापं शिष्यपापं गुरुस्तथा।
जिस देश में पाप हो तो उसके लिए राजाको, राजा पाप करे तो मंत्रियोंको, स्त्री गलत काम करे तो पतिको और शिष्य पाप करे तो गुरु को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।
If a country goes in a wrong way/ does a sin then the king should be held responsible. If king commits a sin then his ministers should be held responsible. If a women does a wrong thing then her husband should be held responsible and if a student commits a sin then his teacher should be held responsible.