अतॄणे पतितो वन्हि: स्वयमेवोपशाम्यति ||
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Wednesday, 11 April 2018
अतॄणे पतितो वन्हि: स्वयमेवोपशाम्यति ||
Saturday, 31 March 2018
सभ्दिस्तु लीलया प्राोक्तं शिलालिखितमक्षरम् ||
Wednesday, 28 March 2018
न क्रुद्ध: परूषं ब्रूयात् स वै साधूत्तम: स्मॄत: ||
Wednesday, 21 March 2018
अदर्शयित्वा शूरास्तू कर्म कुर्वन्ति दुष्करम् ||
Monday, 19 March 2018
मनस्यन्यत् वचस्यन्यत् कर्मण्यन्यत् दुरात्मनाम् ||
Friday, 2 March 2018
सुभाषितं च सुस्वादु सद्भिश्र्च सह संगम: ||
Wednesday, 28 February 2018
प्रभुत्वं प्रश्रयोपेतं चिन्हमेतन्महात्मनाम् ||
Tuesday, 27 February 2018
सज्जनस्य तु दानाय रक्षणाय च ते सदा ||
Monday, 26 February 2018
अविश्वस्ते विश्वसिति मूढचेता नराधम: ||
Tuesday, 20 February 2018
न अदन्ति सस्यं खलु वारिवाहा परोपकाराय सतां विभूतय: ||
Wednesday, 20 December 2017
Thursday, 7 December 2017
Tuesday, 21 November 2017
संपूर्णकुंभो न करोति शब्दं अर्धोघटो घोषमुपैति नूनम् ।
विद्वान्कुलीनो न करोति गर्वं जल्पन्ति मूढास्तु गुणैर्विहीनाः ॥
A fully filled water container will not create much noise as compared to the half filled one. (When the containers are given some jirk the water inside it will also move and create some noise.). Similarly 'Vidvaan' (Intelligent) people always remain calm and will not have any mis-placed pride as opposed to the people who know very less but always keep talking.
जिस प्रकार से आधा भरा हुआ घड़ा अधिक आवाज करता है पर पूरा भरा हुआ घड़ा जरा भी आवाज नहीं करता उसी प्रकार से विद्वान अपनी विद्वता पर घमंड नहीं करते जबकि गुणविहीन लोग स्वयं को गुणी सिद्ध करने में लगे रहते हैं।
Sunday, 19 November 2017
Saturday, 18 November 2017
माभूत्सज्जनयोगो यदि योगो मा पुनः स्नेहो,|
स्नेहो यदि विरहो मा यदि विरहो जीविता आशा का।|
सज्जन व्यक्तियों से निकट संपर्क मत करो, और यदि करो भी तो फिर उनसे स्नेह मत करो। यदि उनसे स्नेह हो जाय तो उनसे सम्बन्ध विच्छेद न करो, क्योंकि यदि ऐसा हो जाय तो फिर जीवित रहने की आशा करना व्यर्थ है।
दुष्ट और सज्जन व्यक्तियों की तुलना करते हुए गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी कहा है कि -
मिलत एक दारुण दुःख देहीं।
विछुरत एक प्राण हर लेहीं।
Friday, 27 October 2017
सद्भिः पुरस्तादभिपूजितः स्यात्
सद्भिस्तथा पृष्ठतो रक्षितः स्यात्।
सदासतामतिवादांस्तितिक्षेत्
सतां वृत्तं चाददीतार्यवृत्तःll
व्यक्ति के कर्म ऐसे होने चाहिए कि सज्जन लोग उसके समक्ष तो सम्मान व्यक्त करें ही, परोक्ष में भी उनकी यह धारणाएं सुरक्षित रहें। दुष्ट प्रकृति के लोगों की गलत बातें सह ले और सदैव श्रेष्ठ लोगों के सदाचरण में स्वयं संलग्न रहे।
गर्वाय परपीड़ाय दुर्जनस्य धनं बलम्।
सज्जनस्य च दानाय रक्षणाय च ते सदा॥
दुर्जन (दुष्ट व्यक्ति) का धन घमण्ड करने के लिये और बल दूसरों को पीड़ा पहुँचाने के लिये होता है और सज्जन का धन दान करने के लिये एवं बल निर्बलों की रक्षा करने के लिये होता है ।
The arrogant (evil person) is proud to be money and to force others to suffer. And the gentleman's money is meant to donate and to protect the weak.
Sunday, 24 September 2017
काव्यशास्त्रविनोदेन कालो गच्छति धीमताम्।
व्यसनेन तु मूर्खाणां निद्रया कलहेन वा॥
_The wise utilize their time enjoying poetry and scriptures whereas fools waste it in bad habits, sleep and quarrel._
बुद्धिमानों का समय काव्य और शास्त्र से आनंद प्राप्त करने में व्यतीत होता है, जबकि मूर्खों का समय व्यसन, नींद और कलह में व्यतीत होता है।
Friday, 8 September 2017
मन्दोऽप्यमन्दतामेति संसर्गेण विपश्चितः।
पङ्कच्छिदः फलस्येव निकषेणाविलं पयः॥
Even a dull person becomes sharp by keeping company with the wise, as turbid water becomes clear when treated with the dust-removing fruit of 'Reetha'.
बुद्धिमानों के साथ से मंद व्यक्ति भी बुद्धि प्राप्त कर लेते हैं जैसे रीठे के फल से उपचारित गन्दा पानी भी स्वच्छ हो जाता है।