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Wednesday, 11 April 2018

क्षमा शस्त्रं करे यस्य दुर्जन: किं करिष्यति |
अतॄणे पतितो वन्हि: स्वयमेवोपशाम्यति ||
जिसके हाथमे क्षमा जैसा हथियार हो उसका दुर्जन भला क्या उखाड़ सकता है। जहा घास न हो वहाँ अग्नि अपने आप ही शांत हो जाती है।  
What can a wicked person do to someone who has the weapon of fogivance in his hands ? Fire fallen on ground without any grass extinguishes by itself.

Saturday, 31 March 2018

असभ्दि: शपथेनोक्तं जले लिखितमक्षरम् |
सभ्दिस्तु लीलया प्राोक्तं शिलालिखितमक्षरम् ||
दुष्ट व्यक्ति द्वारा की गई शपथ पानी पर लिखी गई बात  की तरह है (बहुत अस्थायी!)  इसके विपरीत, संतों द्वारा उल्लिखित अनौपचारिक शब्द भी चट्टानों पर लिखी हुई बात  की तरह हैं!
The oath taken by the wicked person are like the letters written on the water (So much temporary !). In contrast, even the informal words uttered by the saintly person are like the letters imprinted on rocks!

Wednesday, 28 March 2018

न प्रा)ष्यति सम्माने नापमाने च कुप्यति |
न क्रुद्ध: परूषं ब्रूयात् स वै साधूत्तम: स्मॄत: ||
उन्हें सबसे अच्छे संत के रूप में घोषित किया जाता है, जो सम्मानित होने पर अति प्रसन्न नहीं होता है, और अपमानित होने पर नाराज़ नहीं होता है और नाराज होने पर भी कठोर शब्द नहीं बोलता है।
He is declared as the best saint, who is not overjoyed when honored, and does not get angry when insulted and also does not speak harsh words when angry.

Wednesday, 21 March 2018

न मर्षयन्ति चात्मानं संभावयितुमात्मना |
अदर्शयित्वा शूरास्तू कर्म कुर्वन्ति दुष्करम् ||
बहादुर लोग उनके सामने प्रशंसाको  नहीं पसंद करते हैं। वे अपने मूल्य को शब्दों से नहीं दिखाते हैं बल्कि मुश्किल काम करते हैं।
The brave people do not like being praised in front of them. They display their valiour not by words but by doing difficult deeds.

Monday, 19 March 2018

मनस्येकं वचस्येकं कर्मण्येकं महात्मनाम् |
मनस्यन्यत् वचस्यन्यत् कर्मण्यन्यत् दुरात्मनाम् ||
मन, भाषण और क्रिया में, महान आत्मा समान हैं, लेकिन दुष्ट, मन, भाषण और क्रिया सबमें अलग-अलग हैं। 
In the mind, speech and action, the great souls are same, but the wicked are different in mind, speech and action. (Wicked people will not be truthful).

Friday, 2 March 2018

संसारविषवॄक्षस्य; द्वे एव मधुरे फले |
सुभाषितं च सुस्वादु सद्भिश्र्च सह संगम: ||
जहरीली वृक्ष (भौतिक दुनिया के रूप में) में केवल दो मीठे फल हैं मधुर सुभाषित  और अच्छे लोगों का साथ।  
Poisonous tree (in the form of materialistic world ) has only two sweet fruits. Sweetest Subhashit and company of good people !

Wednesday, 28 February 2018

विवेक: सह संपत्या विनयो विद्यया सह |
प्रभुत्वं प्रश्रयोपेतं चिन्हमेतन्महात्मनाम् ||
यह महान लोगों का संकेत है कि धन के साथ विवेक, ज्ञान  के साथ नम्रता, (और) विनम्रता के साथ शक्ति।
This is the indication of great people that (they have) discretion along with wealth, humbleness along with scholarship, (and) power with courteousness.

Tuesday, 27 February 2018


गर्वाय परपीडायै दुर्जस्य धनं बलम् |
सज्जनस्य तु दानाय रक्षणाय च ते सदा ||
दुर्जन के पास रहा हुआ धन सिर्फ दिखावे के लिए है और शक्ति दूसरोंको कष्ट देने में है, और सज्जन का धन दान के लिए है और बल दूसरोकि रक्षा करने के लिए है।  
Wealth and strength of a wicked person is for his vanity(show off) and (ability) to trouble others (respectively). for a good person, they are always for donating (or say sharing with others) and to protect (others) (respectively).

Monday, 26 February 2018

अनाहूत: प्रविशति अपॄष्टो बहु भाषते |
अविश्वस्ते विश्वसिति मूढचेता नराधम: ||

Subhashitkar has given some of the characteristics of a fool person here. He says, a fool person comes without invitation (he lands up anywhere even if he is not required i.e. he does not have self respect), talk even if not asked for (they have habit of poking his nose in other's business), and trusts a person who is not trustable (he is not able to evaluate others properly)

Tuesday, 20 February 2018

पिबन्ति नद्य: स्वयम् एव न अम्भ: स्वयं न खादन्ति फलानि वॄक्षा: |
न अदन्ति सस्यं खलु वारिवाहा परोपकाराय सतां विभूतय: ||
नदियों ने अपना पानी पीना नहीं पेड़ अपने फलों को नहीं खाते हैं बादल उन फसलों को नहीं खाते हैं, जिसको  वे पानी देते हैं। अच्छे लोगों ('सजजन') की संपत्ति वास्तव में दूसरों की मदद करने के लिए है (वे खुद  उपभोग नहीं करते!)।

The rivers don't drink their own water. The trees don't eat their own fruits.
 The clouds don't eat the crops to which they give the water.
 The wealth of the good people ('sajjan') is really only for helping the others.
 (They themselves don't consume what they produce!)

Wednesday, 20 December 2017

असज्जनः सज्जनसंगि संगात्
करोति दुःसाध्यमपीह साध्यम् ।
पुष्पाश्रयात् शम्भुशिरोधिरूढा
पिपीलिका चुम्बति चन्द्रबिम्बम् ॥

सज्जन के सहवास से असज्जन दुःष्कर कार्य को भी साध्य बनाता है । पुष्प का आधार लेकर शंकर के मस्तक पर की चींटी चंद्रबिंब का चुंबन करती है।

Thursday, 7 December 2017

बोधितोऽपि बहु सूक्तिविस्तरैः
किं खलो जगति सज्जनो भवेत् ।
स्नापितोऽपि बहुशो नदीजलै-
र्गर्दभः किमु हयो भवेत् क्वचित् ॥

अच्छे वचनों के उपदेश देने से क्या इस दुनिया में दुष्ट मानव सज्जन हो जायेंगे ? नदी के पानी से बार बार स्नान कराने के बावजुद क्या गधा कभी घोडा बन पायेगा ?

केषां न स्यादभिमतफला प्रार्थना ह्युत्तमेषु ।।

उत्तम जनों से की हुई प्रार्थना किसकी सफल नहीं होती । अर्थात् सज्जनो से प्रार्थना करने के बाद कोई भी हताश नहीं होता ।

Tuesday, 21 November 2017

संपूर्णकुंभो न करोति शब्दं अर्धोघटो घोषमुपैति नूनम् ।
विद्वान्कुलीनो न करोति गर्वं जल्पन्ति मूढास्तु गुणैर्विहीनाः ॥

A fully filled water container will not create much noise as compared to the half filled one. (When the containers are given some jirk the water inside it will also move and create some noise.). Similarly 'Vidvaan' (Intelligent) people always remain calm and will not have any mis-placed pride as opposed to the people who know very less but always keep talking.

जिस प्रकार से आधा भरा हुआ घड़ा अधिक आवाज करता है पर पूरा भरा हुआ घड़ा जरा भी आवाज नहीं करता उसी प्रकार से विद्वान अपनी विद्वता पर घमंड नहीं करते जबकि गुणविहीन लोग स्वयं को गुणी सिद्ध करने में लगे रहते हैं।

Sunday, 19 November 2017


वृश्र्चिकस्य विषं पुच्छं मक्षिकायाः विषम् शिरः ।
तक्षकस्य विषं दन्तं सर्वांगम् दुर्जनस्य च ।।

बिच्छूका जहर उसकी पूंछमें होता है, भौंरे का जहर उसके सर में होता है, तक्षक साँप का जहर उसके दांतों में होता है मगर दुष्ट आदमी के हरेक अंग जहर से भरे हुए होते हैं ।                        

Saturday, 18 November 2017


माभूत्सज्जनयोगो  यदि  योगो मा पुनः स्नेहो,|
स्नेहो यदि विरहो मा यदि विरहो जीविता आशा का।|

सज्जन व्यक्तियों से निकट  संपर्क मत करो, और यदि करो  भी तो फिर उनसे स्नेह मत करो। यदि उनसे स्नेह हो जाय तो उनसे सम्बन्ध विच्छेद न करो, क्योंकि यदि ऐसा हो जाय तो फिर जीवित रहने की आशा करना व्यर्थ है।

दुष्ट और सज्जन व्यक्तियों की तुलना करते हुए गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी कहा है कि -
मिलत एक दारुण दुःख देहीं।
विछुरत एक प्राण हर लेहीं।

Friday, 27 October 2017

सद्भिः पुरस्तादभिपूजितः स्यात्
सद्भिस्तथा पृष्ठतो रक्षितः स्यात्।
सदासतामतिवादांस्तितिक्षेत्
सतां वृत्तं चाददीतार्यवृत्तःll

व्यक्ति के कर्म ऐसे होने चाहिए कि सज्जन लोग उसके समक्ष तो सम्मान व्यक्त करें ही, परोक्ष में भी उनकी यह धारणाएं सुरक्षित रहें। दुष्ट प्रकृति के लोगों की गलत बातें सह ले और सदैव श्रेष्ठ लोगों के सदाचरण में स्वयं संलग्न रहे।


गर्वाय परपीड़ाय दुर्जनस्य धनं बलम्।
सज्जनस्य च दानाय रक्षणाय च ते सदा॥

   दुर्जन (दुष्ट व्यक्ति) का धन घमण्ड करने के लिये और बल दूसरों को पीड़ा पहुँचाने के लिये होता है और सज्जन का धन दान करने के लिये एवं बल निर्बलों की रक्षा करने के लिये होता है ।

The arrogant (evil person) is proud to be money and to force others to suffer. And the gentleman's money is meant to donate and to protect the weak.

Sunday, 24 September 2017


काव्यशास्त्रविनोदेन कालो गच्छति धीमताम्।
व्यसनेन तु मूर्खाणां निद्रया कलहेन वा॥

_The wise utilize their time enjoying poetry and scriptures whereas fools waste it in bad habits, sleep and quarrel._

बुद्धिमानों का समय काव्य और शास्त्र से आनंद प्राप्त करने में व्यतीत होता है, जबकि मूर्खों का समय व्यसन, नींद और कलह में व्यतीत होता है।

Friday, 8 September 2017

मन्दोऽप्यमन्दतामेति संसर्गेण विपश्चितः।
पङ्कच्छिदः फलस्येव निकषेणाविलं पयः॥

Even a dull person becomes sharp by keeping company with the wise, as turbid water becomes clear when treated with the dust-removing fruit of 'Reetha'.

बुद्धिमानों के साथ से मंद व्यक्ति भी बुद्धि प्राप्त कर लेते हैं जैसे रीठे के फल से उपचारित गन्दा पानी भी स्वच्छ हो जाता है।